उन्मनी वाङमय

उपांत्य अंकीं बीजाक्षर प्रवर्तले प्रियाळ।

६-९-४३

 

स्वस्ति! मत्स्येंद्र संहिते, श्री वैष्णवि!।

शांते अवधूते सहजे संवित्शांभवि!।

जयश्रिये! संकेतस्थे, शब्दशाबरभैरवि!।

केवलगर्भे! नमो%स्तु ते ।। ।।१।।    

 

चमकली कीं दहरकुहरीं विद्युल्लेखा।

उमटली कीं  गुप्तर्थाची बोलकी  रेखा।

हेलावली वा रससागरी श्रीमहामत्स्यनौका।

गोरक्षगीता उन्मेषली  ।। ।।२।।

   

कर्पूरज्योतींची तेजाळली राणीव।

अखंडार्थवृत्तीची फेसाळली शहाणीव।

शांतल्या अद्भुताची कल्लोळली जाणीव।

'श्री-ज्ञान टीका मुकुलली ।। ।।३।।    

 

श्रीविद्येचा पंथराज नवरसाळ।

नवपीठांत नवनटले श्रीसंकेतश्रियाळ।

उपांत्य अंकीं बीजाक्षर प्रवर्तले प्रियाळ।

अंत्यकोटींत अद्वैतसिद्धी!  ।। ।।४।।    

 

घडी घडी मोडली महावस्त्रांची।

धडी धडी भरली बीजाक्षरमंत्रांची।

पुडी पुडी सोडली संकेतरत्नांची।

पंथविद्या ही प्रफुल्लली ।। ।।५।।  

आमचा पत्ता

Dr. Samprasad and Dr. Mrs. Rujuta Vinod
Shanti-Mandir, 2100, Sadashiv Peth, Vijayanagar Col.
Behind S. P. college Pune - 411030 

 

दूरध्वनी क्रमांक

+91 90227 10632

 
 
 

ई-मेल आयडी

Search