उन्मनी वाङमय

२० ऑक्टोबर १९३८

एकूण श्लोक:५

 

संध्याकाळी ०४.३०

 

नाथ समर्थ चौरंगी। महाराज राजयोगी  ।।१।।

 

योगि ज्ञानियाचा राव। रिद्धि सिद्धि सावयव  ।।२।।

 

ज्याचें नाम घेतां मुखीं। धन्य होइजे त्रिलोकीं  ।।३।।

 

ज्ञान प्रगटे अंतरीं । ऐसी प्रसादाची थोरी  ।।४।।

 

टीकादासाचें माहेर। ब्रह्मविद्येचें भांडार     ।५।।

आमचा पत्ता

Dr. Samprasad and Dr. Mrs. Rujuta Vinod
Shanti-Mandir, 2100, Sadashiv Peth, Vijayanagar Col.
Behind S. P. college Pune - 411030 

 

दूरध्वनी क्रमांक

+91 90227 10632

 
 
 

ई-मेल आयडी

Search