- माऊली (१९५६)
आज मुहूर्तवू या एक नित्योत्सव। अद्वैत आमोदे, जेणे फुलेल हे विश्व। क्षणोक्षण प्रभातेल नवोनव महापर्व। प्रसादचिन्ह श्री-श्री-श्रीविद्येचे।।१।।
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